Hindi Quote in Poem by नंदलाल मणि त्रिपाठी

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रचनाकार -

रचना निर्माण सिर्फ ईश्वर बस की बात।
मानव यदि रचना करती आत्मा ईश्वर अंश साक्षात विराजमान।!

कविता मानस पटल पर उपजा विचार भाव भावना प्रवाह।
सम्यक समय की धारा यथार्थ, कविता साहित्य समाज का दर्पण।!

कविता साहित्य समाज का दर्पण, अतीत इतिहास अवनि पर
वर्तमान की प्रेरक प्रेरणा का साक्षात, कवि की कल्पना उड़ान।!

व्यंग हास्य परिहास वीरता भक्ति रौद्र रुद्र बिभत्स करुणा प्रेम रस श्रृंगार।
कवि कविता की मौलिकता भौतिकता आध्यात्मिकता जन्म जीवन संस्कृति संस्कार।!

कविता को कविता रहने दो, दूषित ना हो कवि का रचना संसार।!
कवि राष्ट्र समाज का प्रहरी प्रहर प्रहर राजनीतिक व्यवहार।!

तुलसी की मानस दोहा छंद चौपाई राम मर्यादा का साक्षात भाव।
आचरण संस्कृति का युग संवाद, सुर सागर की गहराई कृष्ण वात्सल्य का गान।!

आज भी कान्हा घर घर हर नवजात का अभिमान।
पृथ्वी राज रासो चंद्र वरदायी राजा कवि की मित्रता का धन्य धरोहर प्रमाण।!

दिनकर, निराला, पंथ, हरिऔध महादेवी रघुपति सहाय हरिवंश बच्चन राय।
जाने कितनी अभिव्यक्ति भाव का भारत हिंदी साहित्य महान।!

कविता को कविता रहने दो, उठे ना कोई विवाद।
कवि तो देश काल परिस्थितियों का वर्त्तमान प्रबाह।!

कवि निश्छल निर्विकार निर्विवाद निर्झर निर्मल गंगा जमुना सागर में।
गागर गागर में सागर की भाव भवना यथार्थ।!

कबीर, रहीम, बिहारी, रसखान मीरा निराकार साकार ब्रह्म भाष्य।
भाषा साहित्य गौरव गान, कविता को कविता रहने दो।

दूषित ना हो कवि की कल्पना रवि कवि का संगम समन्यवय साथ।!

नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।!

Hindi Poem by नंदलाल मणि त्रिपाठी : 111990972
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