Hindi Quote in Poem by नंदलाल मणि त्रिपाठी

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मेवाड़ अभिमान ---


घावों से रक्त का प्रवाह भयंकर पीड़ा से बेपरवाह,युद्ध भूमि का पराक्रम साहस शक्ति शौर्य की प्रतिष्ठा परिभाषा पहचान।!

शान स्वाभिमान संग्राम का सांगा सूरमा रण का रणंजय,महारथी मृत्युंजय सांगा राणा मेवाड़ मुकुट नगीना राजपूताना संस्कृति संस्कार।!

युग गूंज शंखनाद माटी का कण कण गवाह,राणा सांगा के रक्त से रणभूमि चित्तौड़ मेवाड़ की धन्य धरा लाल।!

सौभाग्य भूमि चंदन सी माटी युग प्रेरणा शिरोधार्य का अभिमान,
उदय नव सूर्योदय का प्रखर निखर प्रचंड प्रवाह!!

वीर वीरता वंश हंस का धरोहर मेवाड़ का युवराज सांगा पराक्रम पराकाष्ठा का अक्षुण्ण सिंह अभिमान!!

पुरुषार्थ की व्याख्या परिभाषा प्रत्यक्ष प्रमाणिक पुरुष,काल कर्तव्य दायित्वों के साहसिक उद्देश्यों का विकट विकराल विजई विजेता महान!!


गिरते उठते संभलते कि जीवन यात्रा दृढ़ संकल्प मुस्कान का वृत्तांत।

उदय का उदित होना मेवाड़ इतिहास त्याग बलिदान के राजपूताना परम्परा का उत्कर्ष!

वर्चस्व वीरता के अंकुरण का अवसर विश्वास चैतन्य जागृति धरातल आकाश!!

निर्माण की सौम्य साहस कठिन चुनौती वरण विजित करने का संकल्प!

उदय तेज तेजस्वी धैर्य शौर्य सबेरा का महाकाल काल की निरंतरता के प्रवाह की नई पहचान।!

प्रताप चित्तौड़ स्वर्णिम स्वाभिमान संसार का उदयीमान सांगा संग्राम समर का विकट कराल विकराल!!

पौरुष पुरुषार्थ का राणा प्रताप युग प्रज्वलित प्रेरणा परम प्रकाश।!

राजपूताना गर्व शान सूर्योदय उदय उदित भय बादल अनिश्चित शक शंका अविश्वास आकाश!!

डोलती अवनि के डगमगाते अस्तित्व अश्मत वर्चस्व की
खंड खंड होती अखंडता
विरासत अन्धकार का विहान!!

वैभव भविष्य के आखिर प्रयास पुरुषार्थ प्रतीक्षा अगमन की श्वास!!

मेवाड़ की महत्व महिमा का वीर चित्तौड़ अभिमान पहचान!!

स्वयं वात्सल्य ममता आंचल की ढाल डर भय से अंजान मेवाड़ की आशाओं का सूरज चांद!!

उदय सिंह उदय पन्ना धाय की त्याग बलिदान के स्वर्णिम अध्याय का उत्कर्ष!

पन्ना राजपूताना स्वाभिमान की तेज मिशाल मशाल सत्य सत्यार्थ निस्वार्थ सेवा त्याग बलिदान की पराकाष्ठा की पूर्णिया चांद।!

मामत्व महान परिवारिक
चित्तौड़ मेवाड़ की धन्य धरोहर राजपूताना वैभव का आधार उदय नये सुबह की मर्यादा का अक्षुण्ण प्रवाह।!

अक्रंता क्रूर लुटेरे सोने की चिड़िया भोले भारत भारतीय भावों को रौंदते!

खंड खंड में विभक्त खोखले मतभेदों में लड़ते झगड़ते!

जिस डाल बैठे कटाते वही डाल भारत में भारतीयों के द्वेष दंभ अहंकार तार तार!

शर्म शर्म सार की नियति निरन्तर का पल प्रहर दिन महीने वर्ष युग की शुरुआत।!

गजनवी के सत्रह प्रहार के सोम नाथ की कराह तैमूर की क्रूरता का भयाभव अत्याचार!!

गोरी के युद्ध कौशल को धूल धूसित करता पृथ्वी पराक्रम पुरुषार्थ का चौहान!!

गद्दारी धोखे बलिदान अल्लाउद्दीन की दुष्टता में नारी मर्यादा का जौहर आग!!

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!!

Hindi Poem by नंदलाल मणि त्रिपाठी : 111990932
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