🌿 "Sawan Aaya, Shiv Mujhme Samaaya" 🌿
(एक नारी के मन की बात — शिव भक्ति में भीगी कविता)
सावन आया, घटाएं छाईं,
मेरे मन में फिर रुनझुन छाई।
ना कोई श्रृंगार खास किया,
बस शिव को अपना दिल सौंप दिया।
न नथ पहनी, न काजल डाला,
बस 'ॐ नम: शिवाय' मन में रच डाला।
ना पूजा में मांगी मन्नत कोई,
बस कहा — "तू रहे, बाकी मुझे कुछ ना होई।"
ना सावन का झूला इस बार डाला,
ना सहेलियों संग मिल कोई गीत गाया।
बस बेलपत्र पे नाम लिखा तेरा,
हर बूंद में तुझको महादेव पाया।
भीगते पत्तों-सी सजी मैं,
हर हर महादेव की गूँज बनी मैं।
सावन आया… और मेरा मन भीग गया,
क्योंकि इस बार शिव, सिर्फ मंदिर में नहीं — मेरे अंदर समा गया।