******"""परछाई *******
आज मैंने अपनी परछाई से पूछ ही लिया,
क्यों चलती हो मेरे साथ यूं साया बनकर?
वो हंसी और बोली, "और है ही कौन तेरे साथ,
जो देखे तुझे इस तनहा रात के अंधेरे में सिसकते हुए।
जबसे तूने रिश्तों की कश्ती बहा दी,
तू अकेला है, बस मैं ही तेरी साथी।
तेरे आंसू, तेरे गम, तेरे सारे दर्द,
मैंने देखे हैं साए की तरह हर कदम पे तेरे।
मैंने पूछा क्यों रहती हो मेरे साथ,
उसने कहा, "बस मैं ही हूं tere saath
जब दुनिया तुझे छोड़कर चली जाएगी,
तू मेरे साथ ही हमेशा जी पाएगी।"
कभी तो लगता था कि कोई अपना होगा,
पर अब हर कोई सिर्फ सपना सा लगता है।
सपनों की राहों में खोए थे हम कभी,
अब उन राहों पे सिर्फ परछाई का पहरा है।
जब भी मैं गिरा, जब भी टूटा बेमिसाल,
सिर्फ मेरी परछाई ने थामा मेरा हाल।
दुनिया ने नफरत की, मुझे ठुकरा दिया,
परछाई ने ही मुझे संभाला और उठाया।
मैंने पूछा क्यों रहती हो मेरे साथ,
उसने कहा, "बस मैं ही हूं तेरा साथ।
जब दुनिया तुझे छोड़कर चली जाएगी,
तू मेरे साथ ही हमेशा जी पाएगी।"
जिन चेहरों पे मैं ऐतबार करता रहा,
वही चेहरें मुझे तन्हाई दे गए।
जिन्हें समझा था मैंने अपने,
वो मुझे अधूरी कहानियां सुना कर चले गए।
जब टूटी उम्मीदें, बिखरे मेरे सपने,
परछाई ने कहा, "तू अकेला मत समझ,
मैं हूं तेरे साथ हर वक्त, हर घड़ी,
तू चल चाहे जहां, मैं रहूंगी वहीं।"
परछाई बोली, "मैं तेरा आईना हूं,
तेरे दर्द, तेरे ग़म का खज़ाना हूं।
तू चाहे भाग ले कहीं दूर किसी कोने में,
पर मैं रहूंगी सदा तेरे साथ इस कोने में।"
मैंने कहा, "तू भी चली जा, छोड़ दे मुझे,
मैं तन्हा ही सही, पर खुद से निपट लूंगा।"
परछाई ने कहा, "इस दुनिया की तरह नहीं हूं,
तू चाहे जितना भगा ले, तुझे कभी न छोड़ूंगी।"
मैंने पूछा क्यों रहती हो मेरे साथ,
उसने कहा, "बस मैं ही हूं तेरा साथ।
जब दुनिया तुझे छोड़कर चली जाएगी।
लेखक
सुहेल अंसारी (सनम)
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