(तेरी धड़कन)
तेरे संग चलूं तो लगे,
हर मोड़ पे कोई मेला हो।
तेरी मुस्कान की छाँव में,
हर मौसम मेरा अपना सा हो।
तेरे संग रंग है जीवन मेरा,
हर दिन लगे जैसे ताज़ा सवेरा।
तेरे बिना अधूरी थी धड़कन,
तू आया तो बजा मन का शेहनाइयों का सवेरा।
तेरे स्पर्श से जैसे चंदन सा मन,
तेरे क़रीब हो हर साँझ और हर क्षण।
तू जब हँसे तो लगे,
सारे तारे झिलमिलाएं गगन।
तेरे नाम की मिठास में,
खुद को हर रोज़ घोल दूँ।
अगर तू पूछे, “क्या हूँ मैं?”
तो कह दूँ — "मैं तुझमें ही पूरा हूँ।"
तेरे संग रंग है जीवन मेरा,
तेरी हँसी में जादू सारा।
तेरे साथ हर बात बने गीत,
तेरा नाम हो मेरा सितारा।
तेरे साथ चाय की प्याली भी,
लगती है जैसे जश्न हो कोई।
सड़क किनारे वो भीगा मौसम,
तेरे संग कविता बन गई।
कभी गुस्से में भी तू लगती,
बिलकुल मेरी प्यारी बच्ची।
तेरे रूठने में भी मस्ती,
तेरे मान जाने में सबसे सच्ची।
तेरे संग ही तो सब रंग हैं,
वरना दुनिया बस सीधी रेखा।
तू है तो मोड़ भी प्यारे लगते,
वरना सफ़र है बस एक रेखा।
तेरे कंधे पे सर रखूँ,
तो वक़्त भी थम जाए।
तेरे बिना जो बीते पल,
उनकी गिनती मिट जाए।
हर किताब, हर गाना,
अब तुझसे जुड़ जाता है।
तेरा नाम आए ज़ुबां पर,
तो दिल हँसता है, मुस्काता ।
कभी तू दूर हुई तो क्या होगा,
ये ख्याल ही डराता है।
पर फिर तेरा चेहरा याद आता है,
और हर डर मुस्कराता है।
तू मेरा कल है, तू मेरा आज,
तेरे ही नाम से जुड़ा हर राज़।
अगर तेरे बगैर कुछ मांगूं कभी,
तो वो भी तुझसे ही हो साज़।
तेरे साथ पूरी दुनिया,
तेरे बिना अधूरी सी मैं।
तेरे हाथ में हाथ हो जब,
तो हर दुआ पूरी सी मैं।
तेरे संग रंग है जीवन मेरा,
हर दिन जैसे प्रेम की कविता।
तेरे होने से हर पल मेरा है,
तू जो साथ है... तो क्या फ़ासला?
तेरे संग चलूं...
बस तेरे संग रहूं...
तू ही मेरा घर है...
तू ही मेरा जुनून।
लेखक।
सुहेल अंसारी (सनम)
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