Hindi Quote in Story by Lalit Kishor Aka Shitiz

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एक सुबह चाय की टपरी पर दो लोग बहस कर रहे थे जिनमें से एक (अंशुल) कहता है "इंसान को डरना नहीं चाहिए डर कमज़ोरी की निशानी है अगर हम डर जाते हैं तो हम समझदारी की टोकरी में दिखावटी मेहनत लिए होते हैं जो क्षण भर में भंगुर हो जाती है"
तभी सामने किशोर चाय का सबड़का लेते हुए कहता है "डर जरूरी है बिना डर के हम शायद सामने वाले को कम समझने की गलती कर बैठते है जो बाद में हमे भारी पड़ सकती है इसलिए डर जरूरी है और बिल्कुल जरूरी है"
अंशुल सिगरेट का धुआं छोड़ते हुए किशोर से कहता है "तुम्हे किससे डर लगता है फ़िर, भूत प्रेत पिशाच या अंधेरे से या कंगाली से या गरीबी से कौनसे श्राप से तुम डरते हो "
किशोर हल्का सा मुस्कुरा कर कहता है

मैं डरता नहीं किसी भूत प्रेत न किसी श्राप से
मैं डरता नहीं ग़रीबी से न कंगाली के जाल से
यह सब तो बदले जा सकने वाले हालात है
यह सब तो चंद चूहों की करामात है

मैं डरता हूं उस भक्षक से
जो कहता खुद को रक्षक है
मैं डरता उस अभिनेता से हूँ
पुकारते जिसे सब नेता हैं

अंशुल हंसता है और सिगरेट को पैरों से कुचल कर बाइक पर सवार हो चला जाता है, किशोर सिगरेट को देखता है कुचलने के बाद भी उसमें से धुंआ निकल रहा होता है तभी कोई गुटके का पीक थूकता है सिगरेट बुझ जाती है धुंआ भी धुंधला सा जाता है, एक लड़का फिर एक सिगरेट जलाता है फिर कुचल कर चला जाता है.........

Hindi Story by Lalit Kishor Aka Shitiz : 111972081
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