तय सफर
अब दिल की धड़कनों में बसाने को जब में आया
मैंने फ़िज़ाओं में फिर दर्द सजाने को दम ये पाया
छुपा के रखी थी ख़्वाहिश निगाहों में कहीं
दवा उसी को तेरे रुख़ पे दिखाने को पाया
फ़स्लों में ख़ुशबुएँ कुछ बची थीं शायद
ख़ुद को खोकर तुझे आज़माने को पाया
मंज़िलें मिलीं मगर मेरी राहें वहीं खो गईं
इस सफ़र को नए पंख लगाने को मनाया
तू आए तो कोई दर्द अब नया न लगे
हर क़तरा आज अश्क़ बन जाने को पाया
वो जो जश्न की दस्तानों में झलकता रहा
वो तुझसे मिलकर खुद को मिटाने को पाया
मेरे लफ़्ज़ अब ख़ामोशियों में छिप गए मगर
दावत हर क़लम को वफ़ा में सुलाने को पाया
मय का असर नहीं रहा इस दौर में अब
कदा तुझे याद कर दिल बहलाने को पाया
तेरी राहों में काँटे भी फूल लगते हैं मयकदा
दिल को फिर से तुझे शनशा बनाने को पाया
किसी पुराने दर्द की तारीकियों में जो रहा
वो साया तुझे दिल में बसाने को कह पाया
वो ग़म जो बहकते बहा करते थे हर रात
आज फिर ख़ुद से ही ख़ुशबू छुपाने को पाया
कभी जो टूटे हुए ख़्वाब थे मेरे हाथों में
उन्हें तुझसे मिलने के लिए बचने को पाया
जो मुक़द्दर का खेल समझा था इश्क़ को
वही इश्क़ सुकून में बदल जाने को पाया
तेरी यादों की बारिश में जो भीगा था कल
उसे आज फिर बेवफ़ा कहलाने को पाया
बिछड़े हैं हम मगर फासले मिट नहीं सके
हर ख़लिश को मैं ज़ेहन से हटाने को पाया
वो लम्हे जो खो गए थे गुज़रे वक्त की तरह
उनको बदबख्त सहमी से लौटाने को पाया
दूरियों से भी कभी फ़र्क़ न पड़ा कहा किसने
दिल को हर बार तेरी राह चमकाने को पाया
जो आसमा टुकड़े बिखरे पड़े थे हर जगह
उन्हें फिर जिदद् से तेरा ग़म कमाने को पाया
मेरे अश्कों का दरिया भी ग़मगीन बनाके मिटाया
मझधार तुझसे मिलने का बहाना जाने को पाया
वो ग़ज़ल जो तुझसे लिखती हुई थी कभी
उसे फिर से तेरा नाम गुनगुनाने को पाया
दहशत़ में बर्बादियाँ ही हासिल हैं शायद
कुछ पाने का हर ग़म अब सजाने को पाया
हर सफ़र की थकन जो कभी दूर न हुई
यादे देख तेरे साथ वक़्त बिताने को पाया
जमाने नाम मेरे लबों पर जबसे आया है
ख़ुशी को भी दिल्ल्गी में जगाने को पाया
वो रूह जो बेज़ार थी तन्हाइयों से बहुत
उसे तुझसे मिलने की राहत पाने को पाया
अब कौन सुकून तेरा ही साया बनकर बसा
तुझसे दूर जा कर फिर पास आने को पाया
मेरी आँखों का नशा भी सच्चा रहा ए दोस्त
रहबर उसे चेहरा फिर से भुलाने को पाया
तेरे बिना भी मेरे दिल सताने ये तो समाया
हर कौने में ख़ुशी को युही सजाने को पाया
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समग्र समाज में आदरयोग्य, सप्रेम स्वरचित
जुगल किशोर शर्मा, बीकानेर