*दोहा-सृजन हेतु शब्द*
*भूख, रोटी, मजदूर, श्रम, सत्ता*
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लगती *भूख* विचित्र है, रखिए इस पर ध्यान।
तन-मन को आहत करे, आदि काल से भान।।
*रोटी* से रिश्ते बनें,जीवन का दस्तूर।
झगड़ें रोटी के लिए, रोटी तन-मजबूर।।
मजदूरी *मजदूर* की, उचित मिलें परिणाम।
क्षुधा पूर्ति को शांत कर, सुख-समृद्धि आराम।।
*श्रम* जीवन का सत्य है, मिले सफलता नेक।
पशु-पक्षी मानव सभी,जाग्रत रखें विवेक।।
*सत्ता*-लोलुपता बढ़े, लोकतंत्र-उपहास।
भरी तिजोरी देखती, जनता रहे उदास।।
मनोज कुमार शुक्ल *मनोज*