धाराएँ नदियों की, बहती हैं जैसे गीत,
प्रेम की धुनें, बुनती हैं सजीव तागे की रीत।
पर्वतों की चोटी पर, छुपे हैं ख्वाब सच्चे,
रात की नर्म चादर, देती है सुकून पच्चे।
सूरज की पहली किरण, करती है दिन की शुरुआत,
नयी उमंगों के संग, खिल उठती है हर बात।
जीवन की इस यात्रा में, हर लम्हा अनमोल,
रात की खामोशी में, बुनते हैं हम जीवन की मोल।