राजा दशरथ ने कैकेयी की बात मानी, भले ही राम को वनवास जाना पड़ा हो ।
श्री राम ने सीता की बात मानी, भले ही हिरण के पीछे जाने के कारण युद्ध करना पड़ा हो ।
रावण ने मंदोदरी की बात नहीं मानी, लंका जल गई और ख़ुद आज तक जलता आ रहा है ।
सीख - पत्नियों की बात मानने में ही भलाई है ।