Hindi Quote in Poem by Sudhir Srivastava

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दोहा - कहें सुधीर कविराय
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विविध
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आज बहुत दुख हो रहा, देख गलत व्यवहार।
ऐसे चलता है नहीं, जीवन का संसार।।

जात पात का हो रहा, राजनीति में खेल।
नेता संग दल पास हैं, जनता सारी फेल।।

नारी शोषण है बना, राजनीति की रेल।
जैसे नारी हो गई, सांप सीढ़ि का खेल।।

नारी शोषित हो रही, नारी ही है मौन।
समझ सको तो दो बता, इसके पीछे कौन।।

साधन सबको चाहिए, करना पड़े न काम।
मुफ्त सदा मिलता रहे, होये अपना काम।।

गर्वित हम सब आज हैं, मेरे प्रिय‌ सुकुमार। चमको बन आदित्य ज्यों, जाने सारा संसार।।

मात पिता का नित्य ही,आप बढ़ाओ मान। और याद यह भी रहे, तुम हो इनकी जान।।

गणपति जी अब आप ही, आकर करो उपाय।
मां बहनों की लाज का, कोई नहीं सहाय।।

नारी अत्याचार का, नित्य बढ़ रहा रोग।
इसको क्या हम आप सब, मान रहे संयोग।।

मातृशक्तियों आप ही, कर लो आज विचार।
काली चंडी तुम बनो, या दिखना लाचार।।

चीख रही है द्रौपदी, और कृष्ण हैं मौन।
बड़ा प्रश्न ये आज है, आगे आये कौन।।

टुकुर टुकुर हम देखते, मौन खड़े चुपचाप।
बहरे भी हम हो गए, सुनें नहीं पदचाप।।

तू ही तो बस खास है, तू ही है मम आस ।
नहीं भरोसा और पर, बस तुझ पर विश्वास।।

मातु पिता का कर रहे, जी भरकर अपमान। फिर भी इच्छा कर रहे, मिले हमें सम्मान।।

नारी सबला हो गई, कैसे कहते आप। अबला नारी सह रही, मन मानुष का पाप।

सागर सा बनिए सभी, मत करना तुम भेद।
जाति धर्म की आड़ में, नहीं करो अब छेद।।

बहती नदियां कब करे, जहाँ तहाँ आराम।
करती रहती है सदा, जो उसका है काम।।

आज दुखी इंसान है , कैसे कहते आप।
इसीलिए है बढ़ रहा, आज धरा पर पाप?।।

खूब कीजिए दुश्मनी, संग गीत संगीत।
राग बेसुरा गाइए, मान लीजिए मीत।।

कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो हँसते शमशान।
उनको कैसे दंड दूँ, सोच रहा भगवान।।

दुखी आज भगवान भी, देख जगत का हाल।
हर कोई करता यहाँ, खुलकर आज बवाल।।

आज मरा वो आदमी, हमको क्या संताप।
हमको तो करना अभी, जाने कितना पाप।।

राम नाम ही सत्य है, जान रहा इंसान।
जब तक वो जिंदा रहा, बना रहा अंजान।।

मुर्दे भी अब कह रहे, सत्य राम का नाम।
जो जिंदा वे पूछते, कहाँ मिलेंगे राम।।

कौन दुखी हैं जगत में, दिखा दीजिए आप।
फिर इतना क्यों हो रहा, नित्य जगत में पाप।।

घात और प्रतिघात से, डरते सारे लोग।
लोगों की मजबूरियाँ, या कोई संयोग।।

सुधीर श्रीवास्तव

Hindi Poem by Sudhir Srivastava : 111948493
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