रिश्तों की तपिश, दूरी का असर इतना,
दिल में खाली जगह, अहसास की कमी है।
सोचों की परतें, चाहत का भरम इतना,
मासूम नज़र आती, अदाओं में सजी है।
इंसान का दुख, आंसू का सफर इतना,
जिनसे कोई वास्ता नहीं, ज़िंदगी जमी हैं।
ख्वाबों की नमी, यादों का धुआं इतना,
जिनमें कहीं रौशनी नहीं, वो ही परी है।
दिलों का बिछाव, अरमानों का फूल इतना,
खुशबू जो नहीं आती, इंतजार कसी है।
बातों की मिठास, लहज़े का असर इतना,
जिनमें कोई ज़हर नहीं, जिंदगी गली है।
फ़ासलों का शोर, नज़दीकियों की ख़लिश इतनी,
जिनसे कोई मुलाकात नहीं, वो ही सबसे अजीजी हैं।
वक्त की रवानी, लम्हों का सबक इतना,
गुज़रा हुआ जो पल नहीं, सबसे शकी है।
सपनों का हश्र, उम्मीद का शोर इतना,
जो हासिल नहीं होते, वही सबसे लिखी हैं।
जज़्बात का सिलसिला, लफ्जों का सफर ऐसा,
जो कह नहीं सकते, वही सबसे हसी हैं।
दिलों की महक, नज़रों का असर इतना,
जो जमीं पे नहीं होते, वही खूबसूरती हैं।