सदियाँ बीत गईं, पर आजतक रातें नहीं बीती।
हर रात के बाद एक रात आती है। दिन नहीं होता। आँखों मे सपने मर गए उस 'दिन के इंतज़ार में...जहाँ सब कुछ प्रकाशमय होता होगा। सब कुछ प्रत्यक्ष दिखता होगा। किसी बनावटी बिम्बों का सहारा नहीं होता होगा। एक सूर्य की लालिमा सब कुछ बदल देता होगा..!!