भावनाओं को अक्षरों का रूप देकर
कागज़ पर बहते हुए उतारती हूँ,
तो कलम की स्याही से बिना बोले
सब कुछ समझाती हूँ...
उलझे हुए मन की तरंगों को
शब्द बनाकर सजाती हूँ,
ऐसे करके मन की वेदना-संवेदनाओं को
कविता में ढालती हूँ...
सुख और दुःख के मिश्रण से
दुनिया को संदेश देती हूँ,
कभी खुद हार जाती हूँ
तो कभी समय को हराती हूँ...
बोलकर कहने के बजाय
लिखकर सब कुछ समझाना चाहती हूँ,
इसलिए भावनाओं को व्यक्त करने के लिए
मैं कविताएँ लिखती हूँ...
Nirali ✍️