सुनो,
तुम ढलती उम्र की फ़िक्र न करो
मुझे तुम्हारी आदतों से इश्क़ है
सादगी से इश्क़ है
आवाज़ से
खामोशी से
आंखों की चमक से
शब्दों की गहराई से
होने के एहसास से
तुम्हारी खुशबू से इश्क़ हैं
मेरे लिये वक़्त चुराकर जब मिलने आते हो तुम
मुझे उन प्यार भरी मुलाक़ातों से इश्क़ है