फ़र्क पड़ना से लेकर फ़र्क पड़ना बंद हो जाने तक का सफ़र व्यक्ति को आत्म मुक्त करने का बेहतरीन सफ़र है । जीवन जब बहुत ज्यादा उलझनों और समस्याओं में लिपटकर परेशान करने लगे तब खुद को ढ़ीठ बना लेना चाहिए। ऐसा ढ़ीठ जिसे अब फ़र्क पड़ना बंद हो चुका है। कुछ अच्छा हो या बुरा , फायदा हो या नुकसान, कोई आए या कोई जाए , कोई जिए या मरे या कोई प्रशंसा करें या अपमान किसी बात पर कोई रिएक्शन नहीं बस मन ही मन शान्त हो मुस्कुरा देना है । ये सब संभव हो जाता है जब बाहरी दिखावे को छोड़ अंतर्मन की दृष्टि से स्वयं को सांसारिक मोह-माया और लगाव से मुक्त कर सत्य को महसूस करने लगता है इंसान! ❤️