सारी उम्र इसमें गुजार दी कि मुझे मान मिले, सम्मान मिले,
दौलत जेब में रहे, और सब जगह मेरी शोहरत हो ।
जंहा भी जाऊं लोग इज्जत दे, मेरे नाम की तारीफ हो,
लोग मुझे अच्छा समझे, मेरे जाने के बाद मुझे याद करे ।
अंत में एक बात समझ आयी नाम, दौलत, शोहरत मुझसे कई गुणा ज्यादा मेरे आने से पहले ना जाने कितनो लोगो पर थी,
पर आज हम उन व्यक्तियों में से कितनो को जानते हैं ।
अभी तक हमने वो ही कमाया जो यंहा छोड़ कर जाना है,
और एक दिन लोग हमे भी भूल जाएंगे ।
हमने कभी वो कमाई नहीं की जो हमे लख-चौरासी के आवागमन से मुक्त करे ।
आजकल तो भक्ति भी सिद्धि की लालसा से की जा रही है ।
लेकिन जब सिद्धि आएगी तो वो मुक्ति का मार्ग अबरुद्ध करके आएगी ।
उसे तो कमाओ जो अपने परिवार के लिए छोड़ना है,
किन्तु उसे अवश्य कमाओ जो शिवशक्ति में विलीन होने के लिए माध्यम बने ।।
मृत्यु के बाद कोई याद करे या ना करे तुझे क्या फर्क पड़ता है ।
शिव-शक्ति के चरणों मे शरण मिले पगलु तो ही जीव तरता है ।।
शिवशक्ति भक्ति, शक्ति, मुक्ति, सद्बुद्धि दे ।