जल जायेगा एक दिन ये सूरज भी तुझसे,
इस सूरज को अपनी सूरत दिखाया ना कर...
तुझे सोचकर बेवजह मुस्कुराता रहता हु,
हकिकत में मिल कभी हर बार सपनो में आया ना कर...
तेरी अनर्गल बातों को भी ख़ामोशी से सुनता हूं,
तू अपने होंठो पे खामोशी का पहरा ना लगाया कर...
तेरी भीगी जुल्फों की खुश्बू में मदमस्त रहने दे मुझे,
इन्हें बांधकर मेरी सांसों को मुझसे चुराया ना कर...
आँखें फिर वक्त पे खुलती नहीं है मेरी,
तू अपनी बांहों में इस तरह सुलाया ना कर...
तुझे बेवजह बेपनाह चाहना आदत है मेरी,
मेरी इस आदत को अब सुधारा ना कर...