मैंने अपने में ही खुद को खुश रखके देखा है,
दुनिया का हो या इंसान का मैंने हर मौसम
बदलते देखा है,
आपने देखा होगा लोगों को अकेला
मैंने भीड़ में लोगों को अकेले राह चलते देखा है,
भरी आँखों से भी लोगों को मुस्कुराते देखा है,
तन्हाई में भी अपने गम को छुपाते देखा है,
लोग टाल देते हैं अपने दर्द को मुस्कराकर
कुछ मेरी तरह,
पर भूल जाते हैं कि जुबान झूठ कहती है
क्योंकि जनाब मैंने आँखों को सच्चाई बताते देखा है। । ।
-श्रुति शर्मा❤