Hindi Quote in Motivational by Jay Vora

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पानी बरसानेवाले यज्ञों में घी का बहुत बड़ा ख़र्च होता है, क्योंकि घी में हवा के रोकने और दूसरे तरल पदार्थों को अपने साथ जमा देने का गुण है, इसीलिए अग्रि के द्वारा आकाश में घी इतना अधिक फेंक दिया जाता है कि वह घृतवाष्प ऊपर की ओर अपना एक सीधा मार्ग बना लेता है, जिसमें वायु प्रवेश नहीं कर सकता। घी का वायुप्रतिरोधक गुण हम प्रतिदिन अपने अनुभव से देखते हैं। हम देखते हैं कि सर्दी के दिनों में वायुप्रवेश से बचने के लिए लोग घी, मक्खन, मलाई या मोम को चेहरे और हाथ-पावों में लगाते हैं जिसके कारण वायु से खाल नहीं फटती। दूसरा अनुभव हम घी को एक कटोरी में भरकर और आग में चढ़ाकर देख सकते हैं। एक ही साथ एक कटोरी में पानी भरकर और दूसरी में घी भरकर आग पर चढ़ाने से हमको दिखलाई पड़ेगा कि घी शान्तरूप से धीरे-धीरे जलकर कम हो रहा है, परन्तु पानीवाली कटोरी की पेंदी में छोटे-छोटे बुदबुदे उत्पन्न होते हैं। बुदबुदे बढ़ते हैं, फूटते जाते हैं और पानी कम हो जाता है। पानी में बुदबुदों के उत्पन्न होने का कारण पानी में हवा का प्रवेश है और घी में बुदबुदों के न होने का कारण हवा का प्रतिरोध है। पानी में हवा प्रवेश कर जाती है, परन्तु घी में प्रवेश नहीं कर सकती। इन दोनों अनुभवों से ज्ञात होता है कि घी में हवा के प्रतिरोध करने का गुण है। यही कारण है कि अग्नि के द्वारा जब आकाश में घी फेंका जाता है तब वह अपने अन्दर वायु को नहीं घुसने देता और दूर तक ऊपर की ओर एक सीधा स्तूपाकार मार्ग बना देता है। फल यह होता है कि नीचे की सघन वायु विरल होकर उड़ जाती है और उस घृतमार्ग में आकाशस्थित जलवाष्प भर जाता है और घी में पानी को जमा देने की शक्ति होने के कारण जलवाष्प सघन हो जाता है और पानी होकर बरस पड़ता है। घी में पानी के जमाने की शक्ति भी सबके अनुभव में है। हम देखते हैं कि सर्दी के दिनों में घी के साथ छाछ का पानी भी जम जाता है। जिस प्रकार सर्दी से घी जम जाता है उसी प्रकार ऊपर के जलवाष्प की ठण्डक से घृतवाष्प भी जम जाता है और अपनी जमावट के साथ-साथ जलवाष्प को भी सघन बना देता है और पानी के रूप में बरसा देता है। अनुमान होता है कि प्राचीन आर्यों ने घृत के इन गुणों के साथ अन्य ऐसे ही पदार्थों के गुणों का संग्रह करके किसी विशेष प्रक्रिया के द्वारा जल बरसाने की विद्या सिद्ध कर ली थी जिससे वे इच्छानुसार जल बरसा लेते थे और जल से वनवृक्षों के, वनवृक्षों से पशुओं और पशुओं तथा वनवृक्षों से समस्त मनुष्यों के अर्थकष्ट को दूर कर देते थे।

Hindi Motivational by Jay Vora : 111857297
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