आलस्योपहता विद्या परहस्तं गतं धनम्। अल्पबीजहतं क्षेत्रं हतं सैन्यमनायकम्॥भावार्थ : आलस्य से विद्या नष्ट हो जाती है । दूसरे के हाथ में धन जाने से धन नष्ट हो जाता है । कम बीज से खेत तथा बिना सेनापति वाली सेना नष्ट हो जाती है ।
वासना एव संसार इति सर्वा विमुञ्चताः ।
तत्त्यागोवासनात्यागात्स्थितिरद्ययथातथा
त्यजेद्धर्म दयाहीनं विद्याहीनं गुरुं त्यजेत्। त्यजेत्क्रोधमुखी भार्या निःस्नेहान्बान्धवांस्यजेत्॥
भावार्थ : धर्म में यदि दया न हो तो उसे त्याग देना चाहिए । विद्याहीन गुरु को, क्रोधी पत्नी को तथा स्नेहहीन बान्धवों को भी त्याग देना चाहिए । कः कालः कानि मित्राणि को देशः को व्ययागमोः। कस्याहं का च मे शक्तिरिति चिन्त्यं मुहुर्मुहुः॥
भावार्थ : कैसा समय है ? कौन मित्र है ? कैसा स्थान है ? आय-व्यय क्या है ? में किसकी और मेरी क्या शक्ति है ? इसे बार-बार सोचना चाहिए ।
आयुर्वेद का पहला नियम भोजन दवा रूपी ही ग्रहण करे । जिस भोजन में तासीर यानि गुणवत्ता ही बीमार करने वाली होवें तो उसका उपयोग कम से कम ही रखे तो बेहतर, 1950 से पूर्व आम भारतीय के भोजन में गेहूॅं का उपयोग कम से कम ही था । परन्तु बहुत सी वैज्ञानिक पद्धतियों के परिणामतः, विभिन्न प्रलोभन बाजारीकरण के कारण रेडीटूईट का ही बाजार सरगर्म है । भागमभाग भरी जीवनयापन की भयावहता में स्वास्थ्य की समझ और शारीरिक आवश्यकताएॅ ही गौण है भोजन,भोग और भजन गुप्त ही रहे, परन्तु कमाल है सब बुछ बाजारी है औपन है, सड़क पर ही है ।
//कृपया प्रतिदिन आहार में जौ,ज्वार,मक्का,बाजरा,चना, मूंग और मोठ का ही दलिया व आटे की रोटी, राब-राबड़ी डोहे की राब-राबड़ी का सेवन करे और निरोगी काया रखें ।//