रामायण भाग - 9
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भरत - मिलाप (दोहा-छंद )
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चित्रकुट में पहुँच गए, लक्ष्मण सीता राम।
वन में आ हर्षित हुए, तनिक किया विश्राम।।
दर्शन कर श्री राम के, पूछा प्रभु का हाल ।
नेत्रों से आंसू बहे, भरत हुए बेहाल l।
भरत मिले श्री राम से, कण्ठ लगाए राम।
अवध लौट कर प्रभु चले, तब पूर्ण हो काम।।
रघुकुल रीति नीति सदा, रखना भाई याद।
वचन सिद्ध पहले करे, बाकी उनके बाद।।
भरत कहे श्री राम जी, रखना मुझको दास।
चरण पादुका पूज कर, करूं वन में निवास।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित