घनश्याम (दोहा - छंद)
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मधुर मधुर मुरली बजे, मन मोहे घनश्याम।
प्रेम विवश मन झूमता, भूली सारे काम।।
मनमोहन की इक झलक, मन को करती शांत।
मन मोहन श्री कृष्ण की, लीला का ना अंत।।
दर्शन कर के श्याम का, मै तो हुई निहाल।
मेरे मोहन श्याम जी, जग के पालन हार।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित