सभी शिव महादेव महाकाल भोलेनाथ शंकर शंभू भक्तों को शुभ संध्याकाल सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं समस्त भक्तों की तरफ से
दोस्तों आज आपके समक्ष प्रस्तुत है भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र एवं कुछ विशेष जानकारी कुछ भक्तों को इस संपूर्ण विषय पाठ के बारे में पता है लेकिन आज तक कुछ भक्त अभी भी भी अजान हैं इस विषेश जानकारी से, तो आओ अवगत होते हैं भगवान शिव के महिमा रूप एवं मंत्र से....... ब्रह्मदत्त
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|| महामृत्युंजय मंत्र ||
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"महामृत्युंजय मंत्र" भगवान शिव का सबसे बड़ा मंत्र माना जाता है। हिन्दू धर्म में इस मंत्र को प्राण रक्षक और महामोक्ष मंत्र कहा जाता है। मान्यता है कि महामृत्युंजय मंत्र से शिवजी को प्रसन्न करने वाले जातक से मृत्यु भी डरती है। इस मंत्र को सिद्ध करने वाला जातक निश्चित ही मोक्ष को प्राप्त करता है। यह मंत्र ऋषि मार्कंडेय द्वारा सबसे पहले पाया गया था।
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|| महा मृत्युंजय मंत्र ||
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ॐ त्र्यम्बक यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धन्म। उर्वारुकमिव बन्धनामृत्येर्मुक्षीय मामृतात् !!
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|| संपुटयुक्त महा मृत्युंजय मंत्र ||
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ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ!!
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|| लघु मृत्युंजय मंत्र ||
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ॐ जूं स माम् पालय पालय स: जूं ॐ।किसी दुसरे के लिए जप करना हो तो-ॐ जूं स
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(उस व्यक्ति का नाम जिसके लिए अनुष्ठान हो रहा हो)
पालय पालय स: जूं ॐ।
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|| मन्त्र जप की विधि ||
0;हा मृत्युंजय मंत्र का पुरश्चरण सवा लाख है और लघु मृत्युंजय मंत्र की 11 लाख है.मेरे विचार से तो कोई भी मन्त्र जपें,पुरश्चरण सवा लाख करें.इस मंत्र का जप रुद्राक्ष की माला पर सोमवार से शुरू किया जाता है.जप सुबह १२ बजे से पहले होना चाहिए,क्योंकि ऐसी मान्यता है की दोपहर १२ बजे के बाद इस मंत्र के जप का फल नहीं प्राप्त होता है.आप अपने घर पर महामृत्युंजय यन्त्र या किसी भी शिवलिंग का पूजन कर जप शुरू करें या फिर सुबह के समय किसी शिवमंदिर में जाकर शिवलिंग का पूजन करें और फिर घर आकर घी का दीपक जलाकर मंत्र का ११ माला जप कम से कम ९० दिन तक रोज करें या एक लाख पूरा होने तक जप करते रहें.अंत में हवन हो सके तो श्रेष्ठ अन्यथा २५ हजार जप और करें.ग्रहबाधा, ग्रहपीड़ा,रोग,जमीन-जायदाद का विवाद,हानि की सम्भावना या धन-हानि हो रही हो,वर-वधू के मेलापक दोष,घर में कलह,सजा का भय या सजा होने पर,कोई धार्मिक अपराध होने पर और अपने समस्त पापों के नाश के लिए महामृत्युंजय या लघु मृत्युंजय मंत्र का जाप किया या कराया जा सकता है.
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|| महा मृत्युंजय मंत्र का अक्षरशः अर्थ ||
त्रयंबकम = त्रि-नेत्रों वालायजामहे = हम पूजते हैं, सम्मान करते हैं, हमारे श्रद्देयसुगंधिम= मीठी महक वाला, सुगंधितपुष्टि = एक सुपोषित स्थिति,फलने-फूलने वाली, समृद्ध जीवन की परिपूर्णतावर्धनम = वह जो पोषण करता है, शक्ति देता है,स्वास्थ्य, धन, सुख में वृद्धिकारक; जो हर्षित करता है, आनन्दित करता है,