दोहा - छंद
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मधुर मधुर मुरली बजे, बस में नहीं शरीर ।
मस्त मगन हो नाचती, राधा जमुना तीर ।।
चंचल मन ये चाहता, जाना जमुना तीर।
कृष्ण दर्श की लालसा, मन हुआ हैं अधीर।।
श्याम सुंदर जानते , मेरे मन की पीर ।
सुबह सवेरे श्याम प्रभु , बैठे जमुना तीर।।
उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित