किसी को कितना भी समज़ालो आखिर में वो वही करेगा जो उसे चाहिए या वो जो वह करना चाहता है
हम भी अपनी ज़िद किसी ओर के लिए छोड़ सकते है क्या !!??
कोई कितना भी समजाले चाहे कितनी भी बुराईया करले पर हम उसी चीज़ के पीछे भागते है ना जो हमे पसंद है जो हमे चाहिए
फिर हम भला कैसे किसी को कीसी बात के लिए रोक सकते है !!
ऐसे वक़्त पर क्या किया जाए...,
यातो जो जैसा है उसे वैसे ही अपनाओ
या फिर खुद बदल जाओ
अगर ये भी नही कर सकते तो फिर सबकुछ भूल जाओ..
(उस इंसान को जिसकी वज़ह है आपको दिक्कत होती है या फिर आपकी वजह से जिनको दिक्कत होती है)