प्रेम का संबन्ध मन से नही ,
हृदय और आत्मा से है |
जो मन से जुड़ा हो वह प्रेम
कभी नही हो सकता | |
प्रेम परमात्मा के प्रासाद का बुलावा है
आसानी से नंबर नही आता |
और जो आ जाये फिर कोई नंबर नही रह जाता |
प्रेम वेदना, समाप्ति का पथ विलीनता है||
#अनुभूत
#इतनी_ही_समझ