भक्ति - दोहे
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नटखट कान्हा खेलते, जमुना जी के तीर।
ग्वाल बाल सब साथ में, ठंडा ठंडा नीर।।
कृष्ण दर्श की प्यास हैं, तरसे है ये नैन।
जाने कब हरि दर्श हो , कब आए वो रैन।।
कृष्ण नाम की धुन लगी,जपे कृष्ण का नाम।
सब ग्रंथों का सार ये, नाम नहीं ये आम।।
Uma vaishnav
मौलिक और स्वरचित