कौन समझता है मुझे तुम्हारे सिवा ,
यह दुनिया व्यापारी है यहाँ केवल
व्यापार है माँ ! |
छल है कपट , झूठ का खुला है पट ,
नही रास आती , न रास आये जहाँ |
ले चल मुझे तू , तू रहती जहाँ |
हो जगह न वहाँ तो बना ले मुझे,
रख चरणो के नीचे चरणपादुका ,
है तरसता हृदय आलिंगन को माँ !
है हिम्मत किसी की , हूँ संतान माँ ||
14/04/2022