बढ़ने से वक्त बदलता है
समंदर सी गहराई लिए रहना
हर पल निर्मल नदी सा बहना
सुंदर काया धूमिल हो जाए
पावन मन का रहे हर कोना
पुरुषार्थ से बदले भाग्य
कर्म के पथ पर बढ़ते रहना
संशय शंका भय को त्यागकर
सपनों के रंग स्वयं बदलना
कठिन है राह कर्म की भारी
दृढ़ संकल्प से मुश्किल हारी
बांध कमर फिर आगे बढ़ना
रखना हर दम हिम्मत से यारी
उगता सूरज पूरब में सुबह
दिन भर पश्चिम तक चलता है
रहना न प्यारे भाग्य सहारे
बढ़ने से वक्त बदलता है
-चमनलाल भारद्वाज