3️⃣1️⃣0️⃣3️⃣2️⃣2️⃣इकत्तिस मार्च दो हज़ार बाइस । गुरुवार । शुभ समय । वसंत ऋतु । वित्तीय वर्ष २०२१-२२ का समापन ।
(१) अपनी समस्याओं की पहचान स्वयं करें दूसरे तो केवल उलझन ही पैदा करेंगे ।
(२) न रुकी वक्त की गर्दिश न ज़माना बदला, पेड़ सूखा तो परिंदों ने ठिकाना बदला ।
(३) अजीब सा भय का माहौल है दुनिया में, अमीरों को डर है कोरोना का और गरीबों को लॉकडाउन का !
(४) पतझड़ में ही रिश्तों की कद्र होती है बारिश में तो हर पत्ता हरा दिखाई देता है ।
(५) बचपन में घड़ी सबके पास नहीं थी लेकिन समय था और आज घड़ी सबके पास है पर समय किसी के पास नहीं ।
(६) ज़िंदगी जितनी भी मुश्किल होगी आप उतने ही मज़बूत बनोगे और आप जितने भी मज़बूत बनोगे ज़िंदगी उतनी ही आसान लगेगी ।
(७) जीभ और शब्द सबके पास होते हैं मगर जो अपने लिए जीते हैं वो कह लेते हैं और जो अपनों के लिए जीते हैं वो सह लेते हैं ।
घर में रहें स्वस्थ रहें ।
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