वेद वाणी 6-75-10
ब्राह्मणासः पितरः सोम्यासः शिवे नो द्यावापृथिवी अनेहसा।
पूषा नः पातु दुरिताद् ऋतावृधो रक्षा माकिर्नो अघशंस ईशत॥ऋग्वेद ६-७५-१०॥
ब्रह्म को जानने वाले ब्राह्मण, पितर, सोम, सत्य, एवं परहित करने वाले यज्ञकर्ता, यें सब हमारी रक्षा करें। द्यावा, पृथ्वी हमारा कल्याण करें। पूषादेव हमे पापो से बचायें। पापी-दुराचारी हमारा शासक कभी न बने।
The Brahmins, Pitras, Soma, Satya, and the Yagya Karta who do welfare of others, may all of them protect us. May Dyaava and the earth bless us. Pushadev save us from our sins. May the sinner and the wicked never become our ruler.