भुला दिया ,देना ही बेहतर है आखिर धूप किसे भाती है सावन की हरियाली मे ?
सूखते अधर , खिले पुष्प के बीच भला कहाँ शोभा पाते है , विरान सड़क पर गुजरता सन्नाटा , मधुर संगीत से सदैव हार ही जाता है |
अच्छा है भूल जाना मृतक शान्ति के लिए उद्धृत मंत्रो का , भोगो की सुलभता के लिए किया यज्ञ पूजन |
-Ruchi Dixit