Hindi Quote in Book-Review by Chirag Vora

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मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ ये मैं क्या, दुनिया का कोई भी प्रेमी अपनी प्रेमिका को नहीं बता सकता है कि आख़िर वो उसे कितना चाहता है..हाँ पर मैं ये कह सकता हूँ कि हमारे बीच ये हज़ारों किलोमीटर की दूरी मुझे कभी दूरी नहीं लगती..जब भी हम कॉल पर बात करते हैं तब बस यही लगता है कि हम दोनों ठीक एक दूसरे के सामने हैं..तब हम इतने पास होते हैं कि मैं तुम्हारे गालों से इन आँसुओं को अपनी उंगलियों पर समेट सकता हूँ..

कभी-कभी तो लगता है मैं तुम्हें बस छू लेने से रह जाता हूँ, अगर तब मैं अपने हाथ बढ़ा कर तुम्हारी जुल्फों को संवारने की कोशिश कर लूँ तो भी इसमें कोई बुराई नहीं..हर छोटे से लेकर बड़ी नोकझोंक के बाद लगता है कि तुम्हें अपनी बाहों में समेट लूँ, तुम्हें कसकर गले लगा लूँ..हाँ मैं ये नहीं कर पाता हूँ, पर जानती हो इसका मुझे मलाल नहीं होता है..क्योंकि इतने सब के बाद तुम्हारा रोते हुए मेरी किसी बात पर अचनाक हँस देना गले लग जाने से कुछ कम नहीं होता है मेरे लिए..

जाने कब इतनी मोहब्बत हो गई मुझे तुमसे की अब तुम्हारा शहर अपना लगता है और अपना शहर पराया..तुम्हारे उस बड़े शहर के चौराहे मुझे अपने इस छोटे से शहर की गलियाँ भूल जाने को कहते हैं..जहाँ अपना सब कुछ छोड़कर तुम्हारा शहर मुझे अपनाने की बातें करता है वहीं मेरा ये दिल तुम्हारे शहर को अपना बना लेने को तब से राज़ी है जब से मैं पहली बार तुमसे मिलने आया था..शायद मैं मौकापरस्त आदमी हूँ, पहले मुझे अपने शहर से उतनी ही मोहब्बत थी जितनी आज तुमसे है..पर आज मैं इसे छोड़कर वहाँ बस जाना चाहता हूँ..

कौन पीछे छूट जाएगा, क्या पीछे छूट जाएगा ये ख़याल अब भी आते तो हैं, पर डराते नहीं हैं पहले की तरह.. असल में पहले की तरह कुछ नहीं रहा है अब..मैं तुमसे प्रेम करता हूँ बस यही बात मायने रखती है मेरे लिए..कितना अज़ीब है ये सब कि अब मैं इस अपने शहर में ख़ुदको किसी मुसाफ़िर की तरह देखता हूँ..कितना अज़ीब है ये कि मैं अपने आस पास की सारी चीजों, सारे रिश्ते-नातों को भूलकर, तुम्हारे शहर से मोहब्बत करता हूँ, तुमसे मोहब्बत करता हूँ..

तो समझ रही हो न तुम..?? समझ रही हो न जान की मैं तुमसे कितनी मोहब्बत करता हूँ..?? ❤️❤️❤️

( Photo ~ video call screenshot 😍 )

Hindi Book-Review by Chirag Vora : 111792714
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