नारी तू नारायणी,
तुझसे ही संसार बना।
तेरे रूप अनेक यहां,
हर रूप में तू है पूजनीया |
कभी मां बन के सृष्टि रचती,
कभी पत्नी बनकर त्याग करें|
कभी बहन के रूप में भाई के,
पग पग जीवन में साथ रहे|
फिर भी इस धरती पर तुझको कई बार नकारा जाता है |
तेरी त्याग तपस्या को,
एक पल में भुलाया जाता है|
सृष्टि का श्रृंगार है तू ,
प्रकृति का अनुपम उपहार है तू |
इसे नकारो ना लोगों, इससे जीवन का सार बना ,
*नारी तू नारायणी ,तुझसे ही संसार बना