0️⃣4️⃣0️⃣3️⃣2️⃣2️⃣चार मार्च दो हज़ार बाइस । शुक्रवार । शुभ समय ।वसंत ऋतु । आज "फुलेरा दूज पर्व" और "श्री रामकृष्ण परमहंस जयंती" है ।
(१) उस लम्हे को बुरा मत कहो जो आपको ठोकर पहुंचाता है अपितु उस लम्हे की कद्र करो क्योंकि वो आपको जीने का अंदाज़ सिखाता है ।
(२) कौन कहता है कि आंसुओं में वज़न नहीं होता, एक भी छलक जाता है तो मन हल्का हो जाता है ।
(३) अहंकार और अकड़, दोनों ही इंसान के बड़े दुश्मन हैं क्योंकि ये न तो आपको किसी का होने देते है और न कोई आपका होना चाहता है ।
(४) एक आशा है जो कभी किसी से संतुष्ट ही नहीं होती और एक संतुष्टि है जो कभी किसी से कोई आशा ही नहीं करती।
(५) पछतावे का कोई मूल्य, अतीत को नहीं बदल सकता और चिंता जैसा कोई मूल्य भविष्य को नहीं बदल सकता !
(६) खोई हुई चीज़ को याद न करो और जो आज मिला है उसे बर्बाद न करो ।
(७) समय गूंगा नहीं बस मौन है, वक्त पर ही बताता है किसका कौन है !
घर में रहें स्वस्थ रहें ।
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