कोई भी मानव नहीं, इतना स्वच्छ, पवित्र ।
पाप निहारे और के, दण्ड दे सके मित्र ।।
दण्ड दे सके मित्र, पूर्ण केवल परमेश्वर ।
वही पाप का दण्ड, हमें दे सकता भू पर ।।
कह'अनंग'करजोरि,दोष सामाजिक होई ।
करो खूब प्रतिकार,बुराई फिर नहिं कोई ।।
अनंग पाल सिंह भदौरिया'अनंग'
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