इस रात का मंजर कुछ और ही होता
अगर तू साथ होता।
इस दिल मे कई दरिया उठता और सिमटता
अगर तू पास होता।।
ये पाक प्रेम तुझे यूँ न ढूँढता
अगर तू पास होता।
ये आंखे सारी रात यूँ न तकती
अगर तू साथ होता।।
इस दिल की धड़कन यूँ बेकल न तडपती
अगर तू पास होता।
ये सांसे यूँ न निकलती
अगर तू साथ होता।।
मीरा सिंह