पँक्तियों में रहना है।
कुछ लिखना है कुछ मिटाना है।
ज़ज़्बातों को शब्दों में बहाना है।
पँक्तियों में मुझे ज़िंदा रहना है
मौन से अब नाता तोड़ना है।
कोई सुने तब न आख़िर मुझे
भी अपने बारे में कुछ कहना है।
कटघरे की जगह अब मुझे
आईने के सामने सच बोलना है।
कुछ सवालों क़े जवाब में ही हूँ
ये बात बताके दिलको मनाना है।