अल्फ़ाज़ पे दीवाने भरोसा नहीं करते
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अल्फाज़ो के इल्मकारों ने कभी दिल को फूल तो कभी शीशा बताया है
कभी आग को शबनम तो कभी इंसान को हैवान ए शैतान बताया है
उस राह के मुशाफिर को कभी गुमराह तो कभी इश्क़ का आवार बताया है
दीवानों को खिदमतेगार तो कभी खिदमतेगार को किसी का यार बताया है
उसकी दहलीज़ पर पड़ी अलफ़ाज़ों की तस्वीर को खंज़र ए शमशीर बताया है
दीवानगी के इस आलम को भी क्या खूब जिसे अल्फाज़ो की जनज़ीर बताया है
-Deepak Bundela AryMoulik