बहुत सुंदर शब्द जो एक
गुरुद्वार के दरवाज़े पर लिखे थे।
यार से ऍसी यारी रख
दुःखमें भागीदारी रख
चाहे लोग कहे कुछ भी
तू तो जिम्मेदारी रख.
वक्त पडे काम आने का
पहले अपनी बारी रख,
मुसीबते तो आएगी
पूरी अब तैयारी रख,
कामयाबी मिले ना मिले
जंग हौंसलों की जारी रख,
बोझ लगेंगे सब हलके
मन को मत भारी रख,
मन जीता तो जग जीता
कायम अपनी खुद्दारी रख ।
🙏