हो सकता है, कभी टूटने लगूं मैं
हो सकता है, कभी थकने लगूं मैं
हो ये भी सकता है, कभी हताश होने लगूं मैं
पर मैं इतना जानती हूं, जब तक उस ईश्वर
ने हाथ थामा है, मुझे चलने से कोई
रोक नहीं सकता, मंजिल तो बाद की बात है,
पर कोशिश करने से कोई रोक नहीं सकता।
श्वेता शर्मा