क्यूँ मार देते हो बेटियों को,
वो अपनी किस्मत लिखवाकर आती है।
कहाँ तुम्हारे हिस्से की थाली खाती है,
कहाँ सारी उम्र तुम्हारे साथ रहती है।
बेटियाँ तो नसीब से मिलती है,
कुछ साल बाद पराये घर चली जाती है।
फिर भी फिक्र तुम्हारी करती है,
मार के बेटियों को कहाँ से लाओगें बहू ??
क्यूँ मार देते हो बेटियों को,
वो अपनी किस्मत लिखवाकर आती है,