सारी दुनिया से मैं किनारा कर लूं
कहो तो इश्क तुमसे दुबारा कर लूं।
मौसमी वादों का तो कोई पता नहीं
कहो तो, तेरे कंधे का सहारा कर लूं।
यूं तो पीता हूँ इश्क-ए-जाम रोज़ मगर
कहो तो,मयखानों से किनारा कर लूं।
चूम तो लो इन हथेलियों को सनम
तुझ पे कुर्बान मैं जीवन सारा कर लूं।
गर नियति की नीयत है ना मिलाने की
कहो तो इन यादों संग गुजारा कर लूं।
-रामानुज दरिया