वक्त-बेवक्त आना उनका
लगने लगा है कोई बहना उनका
खुशीयों के मेले में घुमाता रहता है मन जिनका
बैचेनीयो की गलियों में हुआ है अब जाना उनका
खोये रहते हैं अपने ही ख्यालों में जो
खो रहे हैं दिल किसी की यादों में अपना
जो सोते थे रातों को सुकुन की निंद कभी
अब ढुंढते हैं आधी रात सुहाना दिन अपना