महीनों बाद दफ्तर आ रहे है
हम एक सदमे से बाहर आ रहे है
तेरी बांहों से दिल ऊबता गया है
अब इस जुले में चक्कर आ रहे हैं..... कहा सोया है चौकीदार मेरा
ये केसे लोग अंदर आ रहे है
समंदर कर चुका तस्लीम हमको
खजाने खुद ही ऊपर आ रहे हैं
यही एक दिन बचा था देखने को
उसे बस मैं बिठा कर आए हैं