तुम देते हो दर्द मुझे मैं हँस कर सह जाता हूँ।
मेरी मुहब्बत तो देखो फिर भी मुस्कुराता हूँ।
कभी दिल करे तो आना मेरी महफ़िल में।
तुम्हें सोच कर लिखे गीत तुम्हे सुनाता हूँ।
तुमसे बात नहीं होती तो कोई मलाल नहीं ।
ख़त लिख कर तुम्हें हाल ए दिल सुनाता हूँ।
क्या फर्क पड़ता है कि तुम हासिल हो मुझे।
तुम्हारी तस्वीर को देख कर रोज़ मुस्कुराता हूँ।
-Arjun Allahabadi