इस तरहाउनका मचलना हो गया,
दो घड़ी दिलका बहलना हो गया।
उसने डाली जब इनायत की नजर
गमजदा मनका संभलना हो गया।
जब नजर आइ निगाहे शोख वोह,
कैसा पल भरका बदलना हो गया
उनको देखा बांह में अगीयार की ,
मनका जैसे यार जलना हो गया।
खो दिया है जबसे अपने होश को,
रंजो गम में अपना ढलना हो गया
उसने ठुकराइ हमारी जब इल्तेजा
अपना अंगारों पर चलना हो गया।
हमसे मासूम जब जताइ बरहमी,
हसरतों का भी पीघलना हो गया।
मासूम मोडासवी