इलम का सबक कुछ मीला तो सही,
नशेमन का ये गुंचा खीला तो सही।
हकीकत का अब सारी तसदीक कर,
दीया देख घर घर जीलमीला तो सही।
तुम्हें याद कर करके सदा जीते रहें,
हमें जामें उलफत तु पीला तो सही।
तेरा साथ भी मेरी अब जरुरत बनी,
तु हम से नजर को मीला तो सही।
सहे गम जहां के सदा तेरी खातीर ,
रहा प्यार का युं सीलसीला तो सही।
तुने दुर रहेने के गहरे जो सदमें दीये,
रहा तुजसे हमको थोड़ा गीला तो सही।
नहीं मानता वो अब मेरी कीसी बात को,
मीला यार है मासूम हठीला तो सही।
मासूम मोडासवी