बस्ती में आज चाँद छत पर नहीं आया !
रब जाने कब हटेगा अमावस का साया !!
मंजर है कैसा फिजा का तनहाइयों मेंडूबा
अश्कों के सितारों से ही रातों को सजाया !!
जिसे देखना मेरी जिंदगी का एक सपना है
वो है की फक़त शरमाके आँखें न मिलाया !!
कब तेरे लबों पर तबस्सुम की लहर होगी
क्या तेरी उदासी को किसीने न मिटाया.??
©हेमशिला माहेश्वरी 'शील'